93वां वायुसेना दिवस समारोह | एयर चीफ ए पी सिंह का ऐलान, भारतीय वायुसेना सिर्फ सैन्य शक्ति नहीं, मानवता की रक्षक भी है

93वां वायुसेना दिवस समारोह | एयर चीफ ए पी सिंह का ऐलान, भारतीय वायुसेना सिर्फ सैन्य शक्ति नहीं, मानवता की रक्षक भी है

हिंडन एयरबेस गाजियाबाद में 93वें वायुसेना स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना आज अत्याधुनिक तकनीक, अद्वितीय साहस और अटूट समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा में तत्पर है। उन्होंने कहा कि हम न केवल आसमान के रक्षक हैं बल्कि राष्ट्र के सम्मान के संरक्षक भी हैं।

एयर चीफ ने हाल ही में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मिशन भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता, समर्पण और कार्यकुशलता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने साबित किया कि प्रशिक्षण, अनुशासन और नेतृत्व की शक्ति से असाधारण लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हर वायु योद्धा का योगदान अमूल्य है। चाहे शांति का समय हो या युद्ध का, हर एक एयर वॉरियर की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह हमारी साझा प्रतिबद्धता, अनुशासन और एकता का परिणाम है कि वायुसेना आज नई ऊंचाइयों पर है।

भविष्य की तैयारियों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि सतर्कता और निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है। हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। बदलती तकनीक और युद्ध के स्वरूप के अनुसार हमारे प्रशिक्षण और रणनीतियां भी विकसित होनी चाहिए।

एयर चीफ ने यह भी कहा कि भारतीय वायुसेना न केवल सीमाओं की रक्षा करने में अग्रणी रही है बल्कि देश में आपदा की स्थिति में भी सबसे पहले राहत पहुंचाने वाली ताकत रही है। चाहे असम की कोयला खदान दुर्घटना हो, मेघालय या तमिलनाडु के सुरंग बचाव अभियान हों या मणिपुर और सिक्किम में आई बाढ़, भारतीय वायुसेना ने हर बार समय पर राहत और बचाव कार्यों को अंजाम दिया है।

उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना ने विदेशों में भी संकट की घड़ी में मानवीय सहायता पहुंचाई है। म्यांमार, वियतनाम, लाओस और केन्या जैसे देशों में राहत सामग्री और संसाधन भेजकर भारतीय वायुसेना ने सेवा परमो धर्मः की भावना को साकार किया है। उन्होंने कहा कि हमारी वायुसेना सिर्फ एक सैन्य शक्ति नहीं बल्कि मानवता की रक्षक भी है।

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि बीते वर्ष भारतीय वायुसेना ने कई अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में भाग लिया जिनमें हमारी टीमों ने उच्च व्यावसायिकता, रणनीतिक कौशल और इंटरऑपरेबिलिटी का प्रदर्शन किया। इससे भारत के सैन्य और कूटनीतिक संबंधों को मजबूती मिली है।

उन्होंने यह भी बताया कि नए सिस्टम और तकनीकी उपकरणों के साथ वायुसेना की परिचालन योजनाओं में तेजी से एकीकरण हुआ है। सुरक्षा, अनुशासन और जवाबदेही की संस्कृति ने वायुसेना को नई ऊंचाइयां दी हैं और दुर्घटनाओं में स्पष्ट कमी आई है।

अपने संबोधन में एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने सभी पूर्व वायुसेना कर्मियों को श्रद्धा और सम्मान अर्पित किया। उन्होंने कहा कि आज जो हम हैं वह हमारे वयोवृद्ध योद्धाओं की दूरदर्शिता, अनुशासन और समर्पण की विरासत का परिणाम है।

उन्होंने पश्चिमी वायु कमान, सभी एयर स्टेशनों, मुख्यालय के अधिकारियों, परेड में शामिल एयर वॉरियर्स और राज्य प्रशासन को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल हमारी गौरवशाली विरासत का प्रतीक है बल्कि आने वाले समय के लिए हमारे संकल्प का संदेश भी है।

अपने प्रेरणादायक संबोधन के अंत में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय वायुसेना सदैव राष्ट्र की सेवा में तत्पर रहेगी। हमारे साहस, प्रतिबद्धता और संकल्प से देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और उसका मान अखंड है।

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