प्रसिद्ध कथावाचिका जया किशोरी ने महाकुंभ पर अपने विचार रखे हैं। लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल आजतक के एक कार्यक्रम उन्होंने कहा कि महाकुंभ में डुबकी लगाने से सभी पाप नहीं धुल जाते, बल्कि सिर्फ वही पाप धुलते हैं जो अनजाने में या गलती से किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोच-समझकर किए गए पापों को गंगा मैया भी नहीं धो सकतीं और उन कर्मों की सजा जरूर मिलेगी।

जया किशोरी ने कहा, “कुंभ में कौन डुबकी लगा रहा है, कौन नहीं, यह बात मुझे नहीं पता। डुबकी लगाने से केवल वही पाप धुलते हैं जो अनजाने में किए गए हैं। सोच-समझकर किए गए पाप नहीं धुलते।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जो लोग जानबूझकर दूसरों को तकलीफ पहुंचाते हैं, उनके पाप गंगा के जल से भी नहीं धुल सकते। “उनका कर्म और सजा तो उन्हें भुगतनी ही पड़ेगी।”
महाकुंभ में नवयुवकों की सक्रियता पर पूछे गए सवाल पर जया किशोरी ने कहा, “हमारा देश बदल रहा है और भक्ति की ओर बढ़ रहा है। लोग अब खुले दिल और मानसिकता के साथ भक्ति और आध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं, जो एक अच्छी बात है।”
महाकुंभ में हुए हादसे पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए जया किशोरी ने कहा, “जिन लोगों के साथ हादसा हुआ, उनके लिए कोई दवाई काम नहीं कर सकती। हम उनके दर्द को कम नहीं कर सकते, लेकिन हम उनका साथ जरूर निभा सकते हैं। हम उन लोगों से माफी भी मांग सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोग महाकुंभ में पहुंचे, यह एक अच्छी बात है, लेकिन हमें मर्यादा और नियमों का पालन करना चाहिए।”
जब जया किशोरी से पूछा गया कि क्या नास्तिक व्यक्ति आध्यात्मिक हो सकता है, तो उन्होंने स्पष्ट किया, “अगर आप आध्यात्मिक हैं तो आपको किसी शक्ति को मानना पड़ेगा, और उस शक्ति का अर्थ कर्म से है। अगर आप सिर्फ खुद को सर्वोपरि मानेंगे तो आप आध्यात्मिक नहीं हो सकते।”