मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का अहम फैसला, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
रायपुर, 1 अप्रैल 2025/ राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों में निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में निर्माण कार्यों के लिए “जिला निर्माण समिति” का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस फैसले पर कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनता के पैसे से चलने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह समिति निर्माण कार्यों के बेहतर क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन का काम करेगी।
जिला निर्माण समिति की संरचना:
- अध्यक्ष: जिला कलेक्टर
- सदस्य: जिले के पुलिस अधीक्षक, सीईओ जिला पंचायत, डीएफओ, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री, जिला कोषालय अधिकारी और संबंधित विभाग के प्रमुख अधिकारी।
समिति का कार्यक्षेत्र पूरे राजस्व जिले तक फैला होगा। निर्माण कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी जाएगी, और कार्यों का निर्धारण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा।
विशेष प्रावधान:
- उच्च प्राथमिकता वाले कार्य: जिन कार्यों के लिए तीन बार ऑनलाइन निविदा आमंत्रित करने के बावजूद ठेकेदार उपलब्ध नहीं होते, उन्हें जिला निर्माण समिति के माध्यम से कराया जाएगा।
- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का ध्यान: ऐसे ब्लॉक, जो गहन रूप से नक्सल प्रभावित नहीं हैं, उनमें जिला निर्माण समिति के माध्यम से कार्य नहीं कराए जाएंगे।
- स्थानीय निधि से कार्य: स्थानीय निधि से किए जाने वाले कार्यों में प्राथमिकता उन एजेंसियों को दी जाएगी जिनमें पीडब्लूडी, आरईएस या पीएमजीएसवाई जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
- कार्य की सीमा: जिला निर्माण समिति के माध्यम से केवल 10 करोड़ तक के कार्य कराए जा सकेंगे।
पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर जोर:
निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए दरों की समुचितता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। निविदा स्वीकार करने वाला प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि दरें उचित हैं, और इसका मूल्यांकन पिछले तीन महीनों की समान प्रकृति की निविदाओं से किया जा सकेगा।
निगरानी और मूल्यांकन:
निर्माण कार्यों की निगरानी और मूल्यांकन लोक निर्माण विभाग या कलेक्टर द्वारा नियुक्त किसी सक्षम तकनीकी अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
इस निर्णय से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी, जिससे स्थानीय जनता को भी लाभ होगा।