रायपुर | 20 मई 2025
छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ियों में की गई कथित तौर पर घटिया सामानों की सप्लाई को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने सरकार और विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि 40 करोड़ रुपये की गड़बड़ी को छिपाने के लिए जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़ों द्वारा बनाई गई जांच समिति दरअसल एक “बचाव समिति” है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और सप्लायर्स को बचाना है।
“मंत्री के संरक्षण के बिना संभव नहीं इतना बड़ा फर्जीवाड़ा” – कांग्रेस
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने सप्लायरों से मोटी लेनदेन कर घटिया क्वालिटी के सामान जैसे – टूटी फर्नीचर, अनाज की घटिया कोठियां, चूहे कुतरे हुए साबुन, जंग लगे नेल कटर, खराब वाशिंग पाउडर, सेनेटरी मशीनें और वजन मापने की खराब मशीनें – लगभग 1500 से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों में सप्लाई करवाईं।
उन्होंने कहा कि अब जब इस पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ है, तब मंत्री जांच कराने की बात कर रही हैं, जबकि सच्चाई यह है कि “जिस विभाग ने गड़बड़ी की है, उसी के अफसर जांच करेंगे – तो निष्पक्षता कैसे संभव है?”
गंभीर सवालों की झड़ी – कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार और विभाग से कई सवाल पूछे:
- जब आंगनबाड़ियों में सामान सप्लाई किया गया, तो उसका भौतिक सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
- सामान की खरीदी के लिए निविदा क्यों नहीं निकाली गई?
- सरकारी मापदंडों का पालन क्यों नहीं हुआ?
- अब जब यह प्रमाणित हो गया है कि सामान खराब थे, तो सप्लायर को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया?
- जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड क्यों नहीं किया गया?
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा,
“यह जांच समिति नहीं, बल्कि घोटालेबाजों को बचाने वाली कमेटी है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और महिला एवं बाल विकास मंत्री को इस भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”
भ्रष्टाचार पर सियासत गरम
प्रदेश कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि इस घोटाले में सरकार की संलिप्तता और भागीदारी के बिना यह फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे राज्यभर में आंदोलन करेंगे।
यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप ले चुका है और संभावना है कि आने वाले दिनों में विधानसभा से लेकर सड़क तक यह मामला गरमाया रहेगा।