Narayanpur Encounter: परिजनों को सौंपे गए मुठभेड़ में मारे गए 27 नक्सलियों में से 20 शव, नारायणपुर में हुआ बसवराजू का अंतिम संस्कार

अबूझमाड़ में मुठभेड़, 27 नक्सली ढेर, बसवराजु समेत ₹3.33 करोड़ के इनामी माओवादियों की मौत

नारायणपुर, छत्तीसगढ़ | 26 मई 2025

छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जंगलों में एक ऐतिहासिक मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 27 नक्सलियों को ढेर कर दिया, जिनमें से एक प्रमुख माओवादी नेता बसवराजु भी शामिल था, जिन पर ₹1 करोड़ का इनाम घोषित था। यह मुठभेड़ 21 मई 2025 को हुई, जिसमें सुरक्षा बलों ने सीपीआई (माओवादी) के महासचिव बसवराजु और अन्य 26 नक्सलियों को मार गिराया।

माओवादी हथियारों की बड़ी बरामदगी

मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में AK-47, INSAS राइफल, SLR, रॉकेट लॉन्चर सहित कई हथियारों को बरामद किया। इस कार्रवाई के दौरान, नक्सलियों द्वारा लूटे गए हथियारों की वापसी भी हुई, जिनमें 2010 में हुए ताड़मेटला हमले के दौरान लूटी गई AK-47 राइफल भी शामिल थी।

मार्च 2025 तक की प्रमुख घटनाओं का रिवाइज़

डीआरजी (जिला रिजर्व गार्ड) की टीम द्वारा इस ऑपरेशन में बरामद किए गए हथियारों में शामिल हैं:

  • AK-47 राइफल – 3 नग
  • INSAS राइफल – 6 नग
  • SLR – 4 नग
  • .303 राइफल – 6 नग
  • रॉकेट लॉन्चर – 2 नग
  • 12 बोर बंदूक – 2 नग
  • अन्य गोला-बारूद और हथियार

बसवराजु की मौत और माओवादी संगठन को बड़ा झटका

बसवराजु, जो सीपीआई (माओवादी) का महासचिव था, को 2018 से देश के सबसे वांछित अपराधियों में गिना जा रहा था, और इस पर छत्तीसगढ़ सरकार ने ₹1 करोड़ का इनाम घोषित किया था। अबूझमाड़ मुठभेड़ में उसकी मौत ने नक्सल संगठन को एक बड़ा झटका दिया है।

मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार

मुठभेड़ में मारे गए 27 नक्सलियों में से 20 शव उनके परिवारजनों को सौंप दिए गए हैं, जबकि बाकी 7 शव जिनमें बसवराजु का शव भी था, का अंतिम संस्कार प्रशासनिक आदेशों के तहत किया गया। इन शवों को नारायणपुर मुख्यालय में विधिपूर्वक जलाया गया।

सीपीआई (माओवादी) की प्रतिक्रिया

माओवादी संगठन ने इस मुठभेड़ के बारे में एक प्रेस नोट जारी कर अपने महासचिव की मौत को महिमामंडित करने की कोशिश की है। संगठन ने अपने समर्थकों से देशभर में रैलियां और सभाएं आयोजित करने की अपील की है, ताकि माओवादी संगठन के नेतृत्व को पुनः सक्रिय किया जा सके।

खुफिया विभाग की चौकसी और निगरानी

माओवादी संगठन के भूमिगत और सतह पर सक्रिय तत्वों पर खुफिया विभाग और पुलिस ने कड़ी निगरानी रखी है। इस मुठभेड़ ने माओवादी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा बलों की रणनीति और उनके साहस को उजागर किया है।


यह ऐतिहासिक मुठभेड़ सुरक्षा बलों की दृढ़ संकल्प और उनके साहस का प्रतीक है, जो नक्सलवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

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