अब बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। यह क्षेत्र, जो पहले नक्सल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था, अब किसानों की खेती के लिए तैयार हो गया है। जहां पहले लाल आतंक का बोलबाला था, वहां अब खेती, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास की उम्मीदें जगी हैं।
बस्तर, जो कभी 1980 के दशक से नक्सलियों का गढ़ था, अब नक्सलियों से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। अबूझमाड़ और ओडिशा सीमा से लगे इस इलाके में पहले सुरक्षा बलों की पहुंच कठिन मानी जाती थी। लेकिन अब यहां सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित हो चुके हैं।
केंद्र सरकार ने बस्तर को वामपंथी उग्रवाद (LWE) जिलों की सूची से बाहर कर दिया है और विशेष सहायता को भी समाप्त कर दिया गया है। जहां पहले नक्सली आदिवासियों से गांजा उगवाते थे, वहां अब किसान सब्जियां और अन्य फसलें उगाएंगे। इससे बस्तर का सामाजिक और आर्थिक जीवन तेजी से बदलने की संभावना है।