RAIPUR: वीरेंद्र तोमर का आलीशान बंगला जांच के घेरे में, अवैध निर्माण पर गिर सकती है गाज

रायपुर (संवाददाता)। भांटागांव स्थित करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर रोहित और वीरेंद्र तोमर का 8,300 वर्गफीट में बना आलीशान बंगला प्रशासनिक जांच के घेरे में आ गया है। नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने रविवार को इस बंगले की नाप-जोख की और दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में निर्माण से जुड़े पुराने और नए दस्तावेजों में कई विसंगतियाँ सामने आई हैं, जिसके चलते कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।

नामांतरण और दस्तावेजों में गड़बड़ी

प्रशासन को जानकारी मिली है कि जिस जमीन पर ‘साईं विला’ नामक यह बंगला बना है, उसका अब तक नामांतरण नहीं हुआ है। भूमि का ऑनलाइन रिकॉर्ड अब भी अनीता गोयल के नाम पर दर्ज है। हालांकि प्लॉट के डायवर्जन सहित कुछ दस्तावेज प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं, लेकिन सत्यापन की प्रक्रिया अभी जारी है।

सोमवार को जारी होगा नोटिस

नगर निगम की टीम को बंगले से कुछ जरूरी दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है। वहीं अन्य आवश्यक दस्तावेजों की मांग को लेकर सोमवार को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यदि निर्माण में अनियमितता पाई जाती है, तो बंगले पर तोड़फोड़ की कार्रवाई भी संभव है।

टैक्स भुगतान पर भी उठे सवाल

प्रशासन ने बंगले के टैक्स भुगतान संबंधी दस्तावेज भी खंगाले हैं। जानकारी के अनुसार बंगले का टैक्स वर्ष 2025 तक जमा है, परंतु निर्माण की अनुमति और वास्तविक निर्माण क्षेत्र के बीच अंतर की भी जांच की जा रही है। रविवार को संपत्ति की नाप के दौरान इस अंतर को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया।

संपत्तियों की व्यापक जांच के आदेश

जिले के राजस्व अधिकारियों और पटवारियों को तोमर बंधुओं की सभी संपत्तियों की जांच के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रशासन उनके नाम दर्ज भूमि, खरीदी-बिक्री के दस्तावेज, डायवर्जन और टैक्स रिकॉर्ड की विस्तृत छानबीन कर रहा है।

पुलिस कार्रवाई के बाद शुरू हुई जांच

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले पुलिस ने रोहित और वीरेंद्र तोमर के आवास पर छापा मारकर लाखों रुपये की नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और हथियार जब्त किए थे। उसी के बाद से प्रशासन ने उनके संपत्ति रिकॉर्ड की जांच शुरू की है।

नगर निगम का बयान

नगर निगम के ज़ोन-6 आयुक्त हितेंद्र यादव ने कहा, “प्राप्त दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। यह स्पष्ट किया जाएगा कि निर्माण की अनुमति कितने क्षेत्र में दी गई थी और वास्तव में कितना निर्माण किया गया है। यदि अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”


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