रायपुर/नई दिल्ली, 31 जुलाई 2025:
मालेगांव विस्फोट मामले में 17 वर्षों की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद एनआईए की विशेष अदालत ने आज सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले में सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित और अन्य शामिल हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में न तो बम बरामद हुआ, न आरडीएक्स मिला और न ही कोई फिंगरप्रिंट। साथ ही एटीएस और एनआईए की चार्जशीटों में काफी भेद भी अदालत ने नोट किए।

फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मीडिया सलाहकार एवं भाजपा नेता पंकज झा ने अपने आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लंबी पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ‘भगवा आतंक’ का मिथक फैलाने के लिए साध्वी प्रज्ञा और अन्य आरोपियों को फंसाया था।

पंकज झा की पूरी पोस्ट इस प्रकार है:

“आज 17 वर्ष बाद भारत की पूज्य साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपी ‘मालेगांव ब्लास्ट’ मामले में बरी हुए हैं। कांग्रेस ने ‘भगवा आतंक’ शब्द को स्थापित करने के लिए इन्हें फँसाया था, अब यह साक्ष्य के साथ स्थापित हो गया है। साध्वी प्रज्ञा ने जो यातनाएँ झेली, रोंगटे खड़े हो जायेंगे सोच कर भी।

अब सोचिए ज़रा!

रोज लगभग 18 हजार मुकदमे दर्ज होते हैं, लेकिन ईसाई महिला के विरुद्ध दर्ज हुए एक मुकदमे पर — इनक्लूडिंग राहुल-प्रियंका — सभी उबल पड़े कि कथित निर्दोषों पर मुकदमे हो रहे हैं। ऐसे लोग किसी बहुसंख्यक अत्याचार पर आवाज उठाना तो दूर, बाकायदा तब ‘हिंदू आतंक’ शब्द गढ़ते रहे थे।

धर्म को अफ़ीम समझने वाली पार्टी की ‘बड़ी बिंदी गैंग’ भी कल दो ईसाई नन की गिरफ्तारी मात्र से आसमान सर पर उठाए रायपुर पहुंच गयी थी, प्रेस को गुमराह करने भी, उसने कभी मालेगांव के इन निर्दोषों के पक्ष में कोई आवाज़ उठायी?

वे रब्बीश जो किसी एक ‘शांतिदूत’ के रिहा होना पर अपने तब के प्रोपगंडा चैनल में घंटों का प्रोग्राम कर देते थे, आज साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित आदि के बर्बाद हुए सत्रह वर्ष पर चार शब्द भी कहना चाहेंगे?

देश की बहुसंख्य जनता इन्हें जितना दंड देगी या देती है, वह तो है ही, पर प्रकृति भी इन गिरोहों को जवाब देती रही है, और आगे भी देगी। ईश्वर की लाठी में आवाज़ नहीं होती, वह लाठी बड़े-बड़ों को ठिकाना लगा देती है। ईश्वर के प्रकोप से डरो मियाँ।”

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। भाजपा समर्थक इसे न्याय की जीत मान रहे हैं, जबकि विपक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

मालेगांव विस्फोट 29 सितंबर 2008 को हुआ था, जिसमें छह लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे। मामले में साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित सहित अन्य पर आतंकवादी गतिविधि का आरोप लगा था। 17 साल बाद अदालत ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए सबूतों के अभाव में सभी को बरी कर दिया है।


By Dhirendra Giri Goswami

धीरेंद्र गिरि गोस्वामी एक प्रसिद्ध पत्रकार हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हैं। उनके पिता रमन गिरि गोस्वामी छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी के शासकीय अधिकारी रह चुके हैं। धीरेंद्र गिरि गोस्वामी ने पत्रकारिता के साथ-साथ वकालत की पढ़ाई भी की है। उन्होंने टीवी, डिजिटल, प्रिंट और रेडियो मीडिया में 15 वर्षों से अधिक अनुभव प्राप्त किया है। अपने करियर में उन्होंने वनइंडिया, खबर भारती, स्वराज एक्सप्रेस, बंसल न्यूज, ईटीवी, न्यूज वर्ल्ड और भारत समाचार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संवाददाता और सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम किया है। धीरेंद्र ने दूरदर्शन (DD News) में रिपोर्टिंग और लाइव कवरेज किया है और आकाशवाणी (All India Radio) में युवाओं और बच्चों के कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रस्तुति दी है। वर्तमान में वे खबरवीर वेबसाइट के संपादक हैं, जहाँ वे ताज़ा समाचार, गहन विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग प्रदान करते हैं। उनका मुख्य फोकस राजनीति, प्रशासनिक मामलों, सामाजिक मुद्दों और कानूनी विश्लेषण पर आधारित पत्रकारिता है। धीरेंद्र ने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर, वकालत (LLB) की पढ़ाई भी पूरी की है, जो उनके विश्लेषण में कानूनी दृष्टिकोण जोड़ती है। वे सामाजिक जागरूकता और समाजोपयोगी मुद्दों को उजागर करने के लिए सक्रिय रूप से लेखन करते हैं। विशेषज्ञता: राजनीति और प्रशासनिक रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता, संपादकीय नेतृत्व, लाइव ब्रॉडकास्टिंग, युवाओं और बच्चों के कार्यक्रम प्रस्तुति।

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