रायपुर, 20 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले सदन में कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए, जिनमें भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और नकल रोकने से जुड़े कड़े प्रावधान शामिल हैं। खास बात यह रही कि ये विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुए और विपक्ष ने भी सरकार का समर्थन किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि आज विधानसभा में दो अहम विधेयक पारित किए गए। पहला ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक, 2026 (Chhattisgarh Karmchari Chayan Mandal Bill, 2026)’ है, जिसका उद्देश्य शासकीय नौकरियों में चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। वहीं दूसरा ‘छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2026 (Chhattisgarh Public Recruitment and Professional Examinations Unfair Means Prevention Bill, 2026)’ है, जो भर्ती परीक्षाओं में नकल और धांधली पर रोक लगाने के लिए लाया गया है।

इसके अलावा इसी सत्र के दौरान ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 (Chhattisgarh Dharma Swatantrya Bill, 2026)’ भी पारित किया गया, जिसे सरकार ने महत्वपूर्ण बताया।

विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य के विकास में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है, लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान पीएससी सहित विभिन्न परीक्षाओं में भ्रष्टाचार हुआ और युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय परीक्षाओं के परिणाम या तो लंबित रहते थे या फिर गड़बड़ियों से प्रभावित होते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आते ही पीएससी घोटाले में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की है और कई आरोपियों को जेल भेजा गया है। उन्होंने बताया कि मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए जांच एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

नए कानून के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक करना, फर्जी अभ्यर्थी बैठाना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल करना अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में 3 से 10 साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, जबकि संगठित अपराध के मामलों में जुर्माना 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। दोषी पाए जाने पर अभ्यर्थियों का परिणाम निरस्त कर उन्हें 1 से 3 वर्ष तक परीक्षा से प्रतिबंधित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि यह कानून पीएससी, व्यापमं सहित विभिन्न भर्ती एजेंसियों, निगमों और मंडलों की परीक्षाओं पर लागू होगा। साथ ही परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों, आईटी सेवा प्रदाताओं और परीक्षा केंद्रों को भी जवाबदेह बनाया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि यह कानून न केवल नकल और धांधली पर लगाम लगाएगा, बल्कि युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा भी मजबूत करेगा और ईमानदार प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर देगा।

FAQ

Q1. छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कौन-कौन से प्रमुख विधेयक पारित हुए?
आज विधानसभा में ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक, 2026 (Chhattisgarh Karmchari Chayan Mandal Bill, 2026)’ और ‘छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2026 (Chhattisgarh Public Recruitment and Professional Examinations Unfair Means Prevention Bill, 2026)’ सहित महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।

Q2. भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक का उद्देश्य क्या है?
इस विधेयक का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक, फर्जी अभ्यर्थियों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए होने वाली धांधली पर सख्ती से रोक लगाना है।

Q3. इस कानून के तहत क्या सजा का प्रावधान है?
कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 3 से 10 साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। संगठित अपराध के मामलों में जुर्माना 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

Q4. क्या अभ्यर्थियों पर भी कार्रवाई होगी?
हाँ, यदि कोई अभ्यर्थी नकल या अनुचित साधनों का उपयोग करता है, तो उसका परिणाम रद्द किया जाएगा और उसे 1 से 3 साल तक परीक्षा से प्रतिबंधित किया जा सकता है।

Q5. यह कानून किन परीक्षाओं पर लागू होगा?
यह कानून पीएससी, व्यापमं और राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों एवं मंडलों द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं पर लागू होगा।

Q6. छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक, 2026 का क्या उद्देश्य है?
इस विधेयक का उद्देश्य सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और निष्पक्ष बनाना है।

Q7. क्या इन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित किया गया?
हाँ, दोनों प्रमुख विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुए और विपक्ष ने भी सरकार का समर्थन किया।

Q8. सरकार के अनुसार इन कानूनों से युवाओं को क्या लाभ होगा?
सरकार का कहना है कि इन कानूनों से भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होगी, नकल और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और मेहनती अभ्यर्थियों को उनका सही अधिकार मिल सकेगा।


By Dhirendra Giri Goswami

धीरेंद्र गिरि गोस्वामी एक प्रसिद्ध पत्रकार हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हैं। उनके पिता रमन गिरि गोस्वामी छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी के शासकीय अधिकारी रह चुके हैं। धीरेंद्र गिरि गोस्वामी ने पत्रकारिता के साथ-साथ वकालत की पढ़ाई भी की है। उन्होंने टीवी, डिजिटल, प्रिंट और रेडियो मीडिया में 15 वर्षों से अधिक अनुभव प्राप्त किया है। अपने करियर में उन्होंने वनइंडिया, खबर भारती, स्वराज एक्सप्रेस, बंसल न्यूज, ईटीवी, न्यूज वर्ल्ड और भारत समाचार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संवाददाता और सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम किया है। धीरेंद्र ने दूरदर्शन (DD News) में रिपोर्टिंग और लाइव कवरेज किया है और आकाशवाणी (All India Radio) में युवाओं और बच्चों के कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रस्तुति दी है। वर्तमान में वे खबरवीर वेबसाइट के संपादक हैं, जहाँ वे ताज़ा समाचार, गहन विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग प्रदान करते हैं। उनका मुख्य फोकस राजनीति, प्रशासनिक मामलों, सामाजिक मुद्दों और कानूनी विश्लेषण पर आधारित पत्रकारिता है। धीरेंद्र ने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर, वकालत (LLB) की पढ़ाई भी पूरी की है, जो उनके विश्लेषण में कानूनी दृष्टिकोण जोड़ती है। वे सामाजिक जागरूकता और समाजोपयोगी मुद्दों को उजागर करने के लिए सक्रिय रूप से लेखन करते हैं। विशेषज्ञता: राजनीति और प्रशासनिक रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता, संपादकीय नेतृत्व, लाइव ब्रॉडकास्टिंग, युवाओं और बच्चों के कार्यक्रम प्रस्तुति।

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