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RTE के तहत प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता होगी रद्द, सरकार सख्त
रायपुर, 7 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ सरकार ने आरटीई (Right to Education) अधिनियम के तहत बच्चों को प्रवेश देने में लापरवाही बरतने वाले निजी विद्यालयों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई निजी स्कूल आरटीई के तहत निर्धारित 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश देने से इंकार करता है, तो उसकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
राज्य में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 अप्रैल 2010 से लागू है। इसके तहत गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सभी बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान
आरटीई के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25% सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले सरकार प्रति छात्र खर्च के आधार पर प्रतिपूर्ति राशि देती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति छात्र होने वाले खर्च या संबंधित निजी स्कूल की फीस (दोनों में से जो कम हो) के आधार पर तय होती है।
अन्य राज्यों से बेहतर प्रतिपूर्ति
छत्तीसगढ़ में आरटीई के तहत दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या उनके समकक्ष है। यहां कक्षा 1 से 5 तक 7000 रुपए और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपए वार्षिक दिए जाते हैं।
तुलना करें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रुपए, बिहार में 6,569 रुपए, झारखंड में 5,100 रुपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रुपए वार्षिक प्रतिपूर्ति मिलती है। हालांकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, लेकिन समग्र रूप से छत्तीसगढ़ की व्यवस्था संतुलित मानी जा रही है।
3.63 लाख से अधिक बच्चों को लाभ
वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में आरटीई के तहत करीब 3,63,515 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस सत्र में कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
शासन ने स्पष्ट किया है कि आरटीई के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्कूल की मान्यता समाप्त करना भी शामिल है।
शिक्षा विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे इस विषय में किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
