आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अबूझमाड़ मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों के शव सौंपे जाने की याचिका पर सुनवाई की

विशेष संवाददाता, विजयवाड़ा | 24 मई 2025

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने शनिवार को उन दो रिट याचिकाओं का निपटारा कर दिया जिनमें छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए दो शीर्ष माओवादी नेताओं के शव परिजनों को सौंपे जाने की मांग की गई थी। याचिकाएं मृतकों के परिजनों द्वारा दायर की गई थीं।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि मुठभेड़ में मारे गए सज्जा वेंकट नागेश्वर राव उर्फ राजन्ना और नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज उनके निकट संबंधी थे, और उन्होंने शवों को प्राप्त करने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस से संपर्क किया, लेकिन उन्हें वहां से भगा दिया गया और शव सौंपने से इनकार कर दिया गया।

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वरिष्ठ अधिवक्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226(2) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि चूंकि याचिकाकर्ता आंध्र प्रदेश निवासी हैं, इसलिए यह मामला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में आता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों — नवल किशोर शर्मा बनाम भारत सरकार (2014) और पीटी परमानंद कटारा बनाम भारत सरकार (1995) — का भी उल्लेख किया।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा नजरबंद किया गया है, जिससे वे छत्तीसगढ़ जाकर शव नहीं ले पा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता ने वर्चुअल माध्यम से दलील दी कि यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है और याचिकाकर्ताओं के आरोप तथ्यहीन हैं। आंध्र प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता ने भी यही रुख अपनाया और कहा कि शव राज्य की सीमा में नहीं हैं, इसलिए यहां की अदालत कोई निर्देश जारी नहीं कर सकती। उन्होंने एल्केमिस्ट लिमिटेड बनाम स्टेट बैंक ऑफ सिक्किम (2007) और नवीनचंद्र एन. मजीठिया बनाम महाराष्ट्र सरकार (2000) मामलों का हवाला दिया।

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केंद्र सरकार की ओर से पेश उपमहान्यायवादी ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कोई भूमिका नहीं है और शव सौंपे जाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है, क्योंकि अंतिम संस्कार के नाम पर जुलूस निकल सकता है।

न्यायमूर्ति हरिनाथ एन. और डॉ. वाई. लक्ष्मण राव की खंडपीठ ने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के मुद्दे में गए बिना याचिकाओं का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता के इस बयान को दर्ज किया कि सभी शवों का पोस्टमार्टम 24 मई तक पूरा कर लिया जाएगा और उसके पश्चात शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छत्तीसगढ़ पुलिस से संपर्क कर शव प्राप्त करने की सलाह दी और यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण ढंग से हो, इसके लिए आवश्यक शर्तें लगाई जा सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि यह मामला छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ से संबंधित है, जिसमें सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए एक बड़े अभियान में सीपीआई (माओवादी) के महासचिव सज्जा वेंकट नागेश्वर राव और वरिष्ठ नेता नंबाला केशव राव मारे गए थे। सज्जा राव पर 10 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया याचिकाकर्ताओं और छत्तीसगढ़ पुलिस के बीच समन्वय पर निर्भर करेगी।

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By Dhirendra Giri Goswami

धीरेंद्र गिरि गोस्वामी एक प्रसिद्ध पत्रकार हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हैं। उनके पिता रमन गिरि गोस्वामी छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी के शासकीय अधिकारी रह चुके हैं। धीरेंद्र गिरि गोस्वामी ने पत्रकारिता के साथ-साथ वकालत की पढ़ाई भी की है। उन्होंने टीवी, डिजिटल, प्रिंट और रेडियो मीडिया में 15 वर्षों से अधिक अनुभव प्राप्त किया है। अपने करियर में उन्होंने वनइंडिया, खबर भारती, स्वराज एक्सप्रेस, बंसल न्यूज, ईटीवी, न्यूज वर्ल्ड और भारत समाचार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संवाददाता और सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम किया है। धीरेंद्र ने दूरदर्शन (DD News) में रिपोर्टिंग और लाइव कवरेज किया है और आकाशवाणी (All India Radio) में युवाओं और बच्चों के कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रस्तुति दी है। वर्तमान में वे खबरवीर वेबसाइट के संपादक हैं, जहाँ वे ताज़ा समाचार, गहन विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग प्रदान करते हैं। उनका मुख्य फोकस राजनीति, प्रशासनिक मामलों, सामाजिक मुद्दों और कानूनी विश्लेषण पर आधारित पत्रकारिता है। धीरेंद्र ने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर, वकालत (LLB) की पढ़ाई भी पूरी की है, जो उनके विश्लेषण में कानूनी दृष्टिकोण जोड़ती है। वे सामाजिक जागरूकता और समाजोपयोगी मुद्दों को उजागर करने के लिए सक्रिय रूप से लेखन करते हैं। विशेषज्ञता: राजनीति और प्रशासनिक रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता, संपादकीय नेतृत्व, लाइव ब्रॉडकास्टिंग, युवाओं और बच्चों के कार्यक्रम प्रस्तुति।

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