झारखंड के वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम: संघर्ष से सफलता की कहानी
बाबूलाल हेम्ब्रम की संघर्षपूर्ण यात्रा: बांस और लोहे की रॉड से वेटलिफ्टिंग तक
खेलो इंडिया एथलीट झारखंड के केरिबांदा से
रायपुर, 28 मार्च: जब पूर्व आर्मी कोच गुरविंदर सिंह ने बाबूलाल हेम्ब्रम को उनकी शारीरिक बनावट के आधार पर वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—इस खेल को जारी रखने के लिए पैसों की कमी।
लेकिन हार मानने के बजाय बाबूलाल ने निर्माण स्थलों पर बांस की लकड़ियों और लोहे की रॉड से अभ्यास शुरू किया। बाद में उन्होंने झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSPS) के कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया, जिसके लिए उन्हें रोज़ाना 60 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में रजत पदक
19 वर्षीय बाबूलाल, जो पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं, ने हाल ही में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता। उन्होंने कहा:
“2018 में जब मैंने इस खेल को अपनाया, हमारे पास ट्रेनिंग के लिए उपकरण और किट खरीदने के पैसे नहीं थे। बांस और लोहे की रॉड से ही अभ्यास करता था। JSPS और अपने कोच के साथ आज मैं यहां हूं।”
अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता की राह
बाबूलाल ने पहले ही 2024 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने आईडब्ल्यूएफ़ वर्ल्ड यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर एवं यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किया।
अब वह सीनियर सर्किट में कदम रख रहे हैं और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने का लक्ष्य रखते हैं। फिलहाल वह पटियाला में राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा हैं।
“खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में रजत पदक मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाया है। मेरा सपना है कि मैं कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करूं।”
