ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। 17 साल के लंबे वनवास के बाद देश लौटे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान की पार्टी ने आम चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया है। मतगणना के ताज़ा रुझानों के मुताबिक BNP 212 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, जबकि जमात-ए-इस्लामी को 70 सीटें मिली हैं। ऐसे में तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने दी बधाई
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पीएम मोदी ने लिखा कि बांग्लादेश में संसदीय चुनावों में बड़ी जीत के लिए वे तारिक रहमान को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। उन्होंने कहा कि यह जनादेश बांग्लादेश की जनता का उनके नेतृत्व पर भरोसा दर्शाता है। भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा और दोनों देशों के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए साथ काम करने को उत्सुक है।
मां खालिदा जिया के निधन के बाद संभाली पार्टी की कमान
तारिक रहमान दिसंबर 2025 में अपनी पत्नी जुबैदा और बेटी जाइमा के साथ ढाका लौटे थे। उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया लंबे समय से बीमार थीं और 30 दिसंबर 2025 को उनका निधन हो गया। मां के निधन के बाद रहमान ने BNP की कमान संभाली और चुनावी अभियान का नेतृत्व किया।
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं। उनकी उम्र लगभग 60 वर्ष है। 2018 से वे विदेश में रहकर ही BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे थे। मजबूत राजनीतिक विरासत के बावजूद उन्हें वर्षों तक देश से बाहर रहना पड़ा।
17 साल तक देश से बाहर क्यों रहे?
2007 में सेना समर्थित कार्यवाहक सरकार के दौरान तारिक रहमान को गिरफ्तार किया गया था। बाद में जमानत पर रिहा होने के बाद वे इलाज के लिए लंदन चले गए। अवामी लीग सरकार के सत्ता में आने के बाद उन पर मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार और 2004 में शेख हसीना की रैली पर ग्रेनेड हमले सहित कई गंभीर आरोप लगे। इन मामलों में दोषी ठहराए जाने के कारण उनकी देश वापसी असंभव हो गई थी।
कैसे खुला वापसी का रास्ता?
2024 में छात्रों के व्यापक आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी। इसके बाद बनी अंतरिम सरकार ने BNP और तारिक रहमान पर लगे कई मामलों को खारिज कर दिया। फरवरी 2026 में चुनावों की घोषणा के साथ ही उनकी वापसी का रास्ता साफ हो गया।
‘बैटल ऑफ बेगम’ से नए दौर की शुरुआत
1991 से बांग्लादेश की राजनीति दो प्रमुख नेताओं—खालिदा जिया और शेख हसीना—के इर्द-गिर्द घूमती रही, जिसे ‘बैटल ऑफ बेगम’ कहा जाता है। अब खालिदा जिया के निधन और हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
वापसी के बाद क्या बोले रहमान?
देश लौटने के बाद एक रैली में तारिक रहमान ने कहा था कि अब लोगों को अपने लोकतांत्रिक अधिकार वापस लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “मेरे पास सपना नहीं, एक योजना है।” उन्होंने एक सुरक्षित, समावेशी और लोकतांत्रिक बांग्लादेश बनाने का संकल्प दोहराया, जहां हर नागरिक बिना डर के जीवन जी सके।
नया राजनीतिक समीकरण
विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान की जीत बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। अब सबकी नजर उनके नेतृत्व और भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई दिशा पर टिकी है।