दिल्ली में सीएम परिषद की बैठक, बस्तर के नवाचारों की देशभर में सराहना
सीएम साय बोले– बंदूकें छिनीं, अब बस्तर के हाथों में गेंद और तीर

नई दिल्ली/रायपुर | मुख्यमंत्री परिषद की बैठक शनिवार को राजधानी दिल्ली के अशोक होटल में हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुलाई गई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के बस्तर मॉडल ने सबका ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने प्रजेंटेशन में ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजनों को जनसहभागिता, संस्कृति और विकास का संगम बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा, “बस्तर ओलंपिक अब केवल खेल नहीं, सामाजिक क्रांति बन चुका है। जिस हाथ में पहले बंदूक थी, आज उसमें तीर-कमान और गेंद है।” इस आयोजन में बस्तर संभाग के सात जिलों के 32 विकासखंडों से 1.65 लाख से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पारंपरिक खेलों पर आधारित इस प्रतियोगिता में जूनियर, सीनियर, महिला और दिव्यांग श्रेणियों में मुकाबले हुए।

व्हीलचेयर पर दौड़ा बस्तर, पीएम ने की तारीफ
साय ने दोरनापाल के पुनेन सन्ना का उदाहरण देते हुए कहा, “जो पहले नक्सल क्षेत्र में था, वह अब व्हीलचेयर दौड़ में पदक जीतकर समाज के लिए मिसाल बना है।” प्रधानमंत्री मोदी भी इस आयोजन की प्रशंसा पहले ‘मन की बात’ में कर चुके हैं। उन्होंने इसे बस्तर की आत्मा का उत्सव बताया था।

बस्तर पंडुम: संस्कृति का उत्सव, पहचान की वापसी
मुख्यमंत्री ने बताया, “बस्तर पंडुम न सिर्फ संस्कृति का उत्सव है, बल्कि परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने का जरिया भी बना है।” इस आयोजन में 1,885 ग्राम पंचायतों के 1,743 सांस्कृतिक दलों और 47 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। लोकनृत्य, पकवान प्रतियोगिता, हाट-बाजार जैसे आयोजनों के जरिए बुजुर्गों से लेकर युवाओं को जोड़ा गया। सरकार ने 2.4 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी।

सुशासन से योजनाएं जमीन पर उतरीं
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ बनाकर योजनाओं की निगरानी तेज की है। ‘अटल मॉनिटरिंग पोर्टल’ जैसे डिजिटल टूल्स से शिकायतों का समाधान तय समय में किया जा रहा है। उज्ज्वला, आयुष्मान, प्रधानमंत्री आवास और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को ग्रामसभा और जनसंवाद के जरिए घर-घर तक पहुंचाया गया है।

देशभर के मुख्यमंत्रियों को पसंद आया बस्तर मॉडल
बैठक में मौजूद मुख्यमंत्रियों और खुद प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर मॉडल को सराहते हुए कहा कि ऐसे नवाचार, जो संस्कृति से जुड़कर विकास की दिशा तय करते हों, उन्हें अन्य राज्यों में भी अपनाया जाना चाहिए।
बस्तर के जंगलों से जो आवाज निकली, उसने दिल्ली दरबार तक अपनी पहचान बनाई है। छत्तीसगढ़ का यह मॉडल बताता है कि जब नीति में लोक हो और योजना में संस्कृति जुड़ जाए, तो सबसे कठिन इलाके भी विकास के रास्ते पर आ सकते हैं।

By Dhirendra Giri Goswami

धीरेंद्र गिरि गोस्वामी एक प्रसिद्ध पत्रकार हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हैं। उनके पिता रमन गिरि गोस्वामी छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी के शासकीय अधिकारी रह चुके हैं। धीरेंद्र गिरि गोस्वामी ने पत्रकारिता के साथ-साथ वकालत की पढ़ाई भी की है। उन्होंने टीवी, डिजिटल, प्रिंट और रेडियो मीडिया में 15 वर्षों से अधिक अनुभव प्राप्त किया है। अपने करियर में उन्होंने वनइंडिया, खबर भारती, स्वराज एक्सप्रेस, बंसल न्यूज, ईटीवी, न्यूज वर्ल्ड और भारत समाचार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संवाददाता और सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम किया है। धीरेंद्र ने दूरदर्शन (DD News) में रिपोर्टिंग और लाइव कवरेज किया है और आकाशवाणी (All India Radio) में युवाओं और बच्चों के कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रस्तुति दी है। वर्तमान में वे खबरवीर वेबसाइट के संपादक हैं, जहाँ वे ताज़ा समाचार, गहन विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग प्रदान करते हैं। उनका मुख्य फोकस राजनीति, प्रशासनिक मामलों, सामाजिक मुद्दों और कानूनी विश्लेषण पर आधारित पत्रकारिता है। धीरेंद्र ने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर, वकालत (LLB) की पढ़ाई भी पूरी की है, जो उनके विश्लेषण में कानूनी दृष्टिकोण जोड़ती है। वे सामाजिक जागरूकता और समाजोपयोगी मुद्दों को उजागर करने के लिए सक्रिय रूप से लेखन करते हैं। विशेषज्ञता: राजनीति और प्रशासनिक रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता, संपादकीय नेतृत्व, लाइव ब्रॉडकास्टिंग, युवाओं और बच्चों के कार्यक्रम प्रस्तुति।

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