छत्तीसगढ़ कोल घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से सौम्या चौरसिया समेत छह आरोपी जमानत पर रिहा, मगर शर्त – राज्य छोड़ना होगा
रायपुर।
570 करोड़ रुपये के बहुचर्चित कोयला परिवहन भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू, समीर बिश्नोई, पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया, रजनीकांत तिवारी, वीरेंद्र जायसवाल और संदीप नायक को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
हालांकि, अदालत ने रिहाई के साथ स्पष्ट शर्त रखी है कि सभी आरोपियों को छत्तीसगढ़ छोड़ना होगा।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में रहने पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि आरोपियों के राज्य में रहने से गवाहों को प्रभावित किए जाने की संभावना है। इसी कारण सभी को राज्य से बाहर रहने का निर्देश दिया गया है।
शुक्रवार को मिली थी जमानत, लेकिन दस्तावेज देर से पहुंचे
सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को ही अंतरिम जमानत मंजूर हो गई थी, लेकिन कानूनी औपचारिकताओं में देरी के चलते आरोपियों को शनिवार सुबह रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा किया गया।
जस्टिस सूर्यकांत और दीपांकर दत्ता की पीठ ने सुनाया आदेश
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता शामिल थे, ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि आरोपियों को राज्य से बाहर रहते हुए शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा।
डीएमएफ घोटाले के आरोपी अब भी जेल में
इधर, डीएमएफ घोटाले से जुड़े आरोपी सूर्यकांत तिवारी और निखिल चंद्राकर की जमानत याचिका पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इसलिए वे फिलहाल जेल में ही रहेंगे।
यह मामला छत्तीसगढ़ की नौकरशाही और राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। आगामी दिनों में इस प्रकरण में और भी अहम मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है।