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रायपुर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 सितंबर 2025 को दिए गए निर्णय के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर प्रदेश भर के शिक्षकों में सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता व्याप्त हो गई है। इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने सामने आकर सरकार को एक व्यावहारिक और समाधानकारी सुझाव दिया है, जिससे न केवल सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अक्षरशः पालन हो सकेगा, बल्कि हजारों कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं भी सुरक्षित रह सकेंगी।

संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का त्वरित विश्लेषण कर पुनर्विचार याचिका दायर की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वर्तमान में कार्यरत किसी भी शिक्षक की सेवा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार विभागीय TET आयोजित कर शिक्षकों को योग्यता की मान्यता दिला सकती है।

शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कोर्ट के आदेश अनुसार दो वर्षों के भीतर TET उत्तीर्ण करना आवश्यक है, तो सरकार को इन दो वर्षों में कम से कम छह बार विभागीय TET आयोजित करनी चाहिए। इससे सभी कार्यरत शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिलेगा और किसी की सेवा प्रभावित नहीं होगी।

SCERT को सौंपी जाए जिम्मेदारी

संघ ने सुझाव दिया है कि SCERT विभागीय TET के लिए कार्यरत शिक्षकों के स्तर के अनुरूप पाठ्यक्रम और मॉड्यूल तैयार करे। प्रशिक्षण की व्यवस्था ऑनलाइन मोड में की जाए, जिससे हर शिक्षक तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके। संगठन ने यह भी कहा है कि वह इस पूरी प्रक्रिया में सरकार और विभाग को हरसंभव सहयोग देने को तैयार है।

सरकार से त्वरित संज्ञान लेने की अपील

संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष चन्द्रशेखर तिवारी और प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि कोर्ट के निर्णय पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से निवेदन किया है कि संबंधित अधिकारियों को जल्द निर्णय लेने हेतु आवश्यक निर्देश दिए जाएं।

प्रदेशभर में मिला समर्थन

संघ के इस सुझाव को प्रदेश के शिक्षकों और शिक्षाविदों से भी समर्थन मिल रहा है। शिक्षकों का कहना है कि विभागीय TET के माध्यम से न केवल सुप्रीम कोर्ट की मंशा पूरी होगी, बल्कि कार्यरत शिक्षकों को योग्यता की मान्यता भी मिल जाएगी। यह प्रस्ताव सरकार, विभाग और शिक्षकों – तीनों के लिए चिंता मुक्त करने वाला समाधान है।

शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारी सुनील सिंह, विष्णु शर्मा, डॉ. सांत्वना ठाकुर, सत्येंद्र सिंह, गजराज सिंह, राजेश शर्मा, शैलेश सिंह, प्रह्लाद जैन समेत दर्जनों पदाधिकारियों ने सरकार से उक्त मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।



By Dhirendra Giri Goswami

धीरेंद्र गिरि गोस्वामी एक प्रसिद्ध पत्रकार हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हैं। उनके पिता रमन गिरि गोस्वामी छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी के शासकीय अधिकारी रह चुके हैं। धीरेंद्र गिरि गोस्वामी ने पत्रकारिता के साथ-साथ वकालत की पढ़ाई भी की है। उन्होंने टीवी, डिजिटल, प्रिंट और रेडियो मीडिया में 15 वर्षों से अधिक अनुभव प्राप्त किया है। अपने करियर में उन्होंने वनइंडिया, खबर भारती, स्वराज एक्सप्रेस, बंसल न्यूज, ईटीवी, न्यूज वर्ल्ड और भारत समाचार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संवाददाता और सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम किया है। धीरेंद्र ने दूरदर्शन (DD News) में रिपोर्टिंग और लाइव कवरेज किया है और आकाशवाणी (All India Radio) में युवाओं और बच्चों के कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रस्तुति दी है। वर्तमान में वे खबरवीर वेबसाइट के संपादक हैं, जहाँ वे ताज़ा समाचार, गहन विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग प्रदान करते हैं। उनका मुख्य फोकस राजनीति, प्रशासनिक मामलों, सामाजिक मुद्दों और कानूनी विश्लेषण पर आधारित पत्रकारिता है। धीरेंद्र ने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर, वकालत (LLB) की पढ़ाई भी पूरी की है, जो उनके विश्लेषण में कानूनी दृष्टिकोण जोड़ती है। वे सामाजिक जागरूकता और समाजोपयोगी मुद्दों को उजागर करने के लिए सक्रिय रूप से लेखन करते हैं। विशेषज्ञता: राजनीति और प्रशासनिक रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता, संपादकीय नेतृत्व, लाइव ब्रॉडकास्टिंग, युवाओं और बच्चों के कार्यक्रम प्रस्तुति।

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