विदेश सचिव ने संसद समिति को बताया: ट्रंप का सीजफायर पर दावा गलत
नई दिल्ली, 19 मई 2025: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को संसद की स्थायी समिति के समक्ष स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुआ सीजफायर पूरी तरह से द्विपक्षीय निर्णय था और इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोई मध्यस्थता नहीं थी।
विदेश सचिव ने समिति को बताया कि पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक ने शनिवार दोपहर 3:35 बजे अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच 5 बजे से युद्धविराम पर सहमति बनी। उन्होंने कहा, “ट्रंप ने सीजफायर के बीच में आने के लिए हमसे कोई अनुमति नहीं ली थी, वो आना चाहते थे, इसलिए आ गए।” यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति के उस दावे के विपरीत था जिसमें उन्होंने सीजफायर को अमेरिकी मध्यस्थता का परिणाम बताया था ।
विदेश सचिव ने यह भी बताया कि सीजफायर के बाद पाकिस्तान ने कई बार समझौते का उल्लंघन किया, जिससे क्षेत्र में तनाव बना रहा। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी अन्य मुद्दे पर बातचीत के लिए कोई सहमति नहीं दी है।(आज तक)
इसके अतिरिक्त, विदेश सचिव ने तुर्की से भारत के रिश्तों में बढ़ते तनाव और पाकिस्तान की परमाणु धमकियों पर भी समिति को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की परमाणु धमकियों को गंभीरता से लिया जा रहा है और भारत अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
विदेश सचिव के इन बयानों से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।
यह घटनाक्रम भारत की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिसमें द्विपक्षीय वार्ता और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही है।