भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अगस्त-सितंबर के मध्य पश्चिमी रिंग रोड का काम आरम्भ कर सकता है, क्योंकि जून में निर्माण कार्यों पर खर्च किए जाने वाला बजट आवंटित होगा। इस दौरान 48 हेक्टेयर वनभूमि को स्वीकृत मिलने की उम्मीद दिखाई आ रही है।
एनएचएआई के प्रस्ताव को इंदौर वनमंडल ने वन विभाग मुख्यालय को प्रेषित कर दिया है, जो पर्यावरण समिति के पास पहुंच चुका है। जून-जुलाई में वनभूमि का सर्वे किया जाएगा। जमीन देने की प्रक्रिया जिला प्रशासन करेगा। अधिकारियों के अनुसार वनभूमि पर पौधे लगाने और रखरखाव का खर्च एनएचएआई देगा।
1500 करोड़ की लागत से 64 किलोमीटर लंबी पश्चिमी रिंग रोड बनाई जाएगी । 638 हेक्टेयर जमीन से सड़क गुजरेगी, जिसमें इंदौर और धार वनमंडल से 48 हेक्टेयर वनभूमि आएगी। इसके लिए इंदौर में 40 और धार में 8-10 हेक्टेयर वन भूमि चिह्नित की गई है। सड़क महू से हातोद और फिर क्षिप्रा तक जाएगी। यह रास्ता बेटमा, सांवेर और तराना से होकर गुजरेगा।
एनएचएआई ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि वह वन विभाग को बदले में देने के लिए भूमि उपलब्ध कराए। जब तक यह भूमि तय नहीं होती, तब तक आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ सकती। वनक्षेत्र में खुदाई की जाएगी, जिसमें निकलने वाली मिट्टी और मुरम का निपटान एनएचएआई को वनक्षेत्र में ही करना है।
जंगल में लगे पेड़ों की गिनती और नए स्थान में पौधारोपण की योजना भी बनेगी। पेड़ों की कटाई, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने के बाद ही निर्माण शुरू होगा। वहीं एक और बड़ी चिंता यह है कि जिन क्षेत्रों से सड़क निकलेगी, वहां नीलगाय, तेंदुआ, सियार जैसे कई वन्यप्राणी निवासरत हैं।