पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर फील्ड मार्शल बने: सिंधूर ऑपरेशन में नाकामी के बावजूद मिला प्रमोशन, शहबाज सरकार का बड़ा फैसला
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सोमवार को एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया। सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर को फील्ड मार्शल की रैंक पर प्रमोट कर दिया गया। यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई संघीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। खास बात ये रही कि पिछले साल ऑपरेशन सिंधूर में करारी सैन्य विफलता के बावजूद उन्हें यह प्रमोशन दिया गया।
सेना में अब तक सिर्फ दो फील्ड मार्शल हुए—मुनीर तीसरे
पाकिस्तान की सेना में अब तक सिर्फ दो लोगों को ही फील्ड मार्शल की रैंक मिली है। असीम मुनीर तीसरे अधिकारी हैं जिन्हें यह पद मिला है। इससे पहले 1965 में जनरल अयूब खान को यह रैंक दी गई थी। मुनीर अब पाक सेना में सर्वोच्च दर्जा रखने वाले अधिकारी बन गए हैं।
कैबिनेट बैठक में हुआ फैसला, शहबाज ने बताया “मजबूत नेतृत्व की जरूरत”
सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा स्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। शहबाज शरीफ ने बैठक में कहा, “जनरल मुनीर ने मुश्किल हालात में भी सेना और देश को संभाला। पाकिस्तान को एक मजबूत और दूरदर्शी सैन्य नेतृत्व की जरूरत है।”
सवाल भी उठे: आखिर हार के बाद क्यों मिला प्रमोशन?
जनरल मुनीर की पदोन्नति को लेकर पाकिस्तान के भीतर सवाल भी उठने लगे हैं। मई 2024 में हुए ‘ऑपरेशन सिंधूर’ के दौरान सेना को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। इसके बाद उनके नेतृत्व पर कई सवाल उठे थे। इसके बावजूद उन्हें फील्ड मार्शल बनाना कई विश्लेषकों के लिए हैरानी का सबब है। कुछ जानकारों का कहना है कि यह कदम सेना की साख बचाने और राजनीतिक मजबूरियों से प्रेरित हो सकता है।
इमरान के खिलाफ सख्ती से बढ़ी पहचान
जनरल मुनीर उस वक्त सुर्खियों में आए जब उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती से आगे बढ़ाया। मई 2024 में हुई हिंसा को उन्होंने ‘सेना के खिलाफ विद्रोह’ बताया था। इसके बाद से ही उन्हें सेना के अंदर “कड़क और वफादार” अफसर की छवि मिली।
क्या है फील्ड मार्शल का ओहदा?
फील्ड मार्शल पाकिस्तान सेना की सर्वोच्च रैंक है। यह सामान्य सेना प्रमुख से भी ऊपर होती है। हालांकि यह एक “सम्मानजनक” पद होता है और इसके जिम्मे कोई नियमित सैन्य कमान नहीं होती, लेकिन इसके जरिए व्यक्ति को सैन्य नीति निर्माण में बड़ा प्रभाव हासिल होता है।
निचोड़ क्या माना जाए?
पाकिस्तान में असीम मुनीर की पदोन्नति ने एक बार फिर सेना और सत्ता की सांठगांठ को उजागर कर दिया है। ऐसे वक्त में जब देश आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य चुनौतियों से जूझ रहा है, यह निर्णय पाकिस्तान की आने वाली दिशा तय कर सकता है।