नई दिल्ली | भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में बढ़े सैन्य तनाव के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि चीन ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ जासूसी और उपग्रह सहायता उपलब्ध कराई। यह खुलासा रक्षा मंत्रालय से संबद्ध थिंक टैंक Centre for Joint Warfare Studies (CENJOWS) द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ सैन्य प्रतिक्रिया की तैयारी शुरू कर दी थी। इस दौरान चीन ने पाकिस्तान को अपने सैटेलाइट इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रडार सिस्टम के माध्यम से मदद पहुंचाई, ताकि भारत की सेनाओं की हरकतों पर नज़र रखी जा सके।

चीन ने ‘जमीनी हकीकत’ पर किया प्रयोग

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने इस मौके को अपनी रक्षा तकनीकों की ‘लाइव टेस्टिंग’ के तौर पर इस्तेमाल किया। इसके तहत न केवल पाकिस्तान को सैटेलाइट डेटा मुहैया कराया गया, बल्कि पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल यूनिट्स को फिर से रीऑर्गनाइज़ करने में मदद भी दी गई।

“चीन ने पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठानों को यह सुनिश्चित करने में मदद की कि भारत की किसी भी हवाई कार्रवाई से पहले उन्हें सटीक अलर्ट मिल सके,” रिपोर्ट में कहा गया।

चीन-पाक गठजोड़ के पीछे की मंशा

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान की यह रणनीतिक साझेदारी भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को संतुलित करने की मंशा से की गई है। रिपोर्ट यह भी इंगित करती है कि पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर ड्रोन, एंटी-ड्रोन और AI आधारित निगरानी प्रणालियों का भी ट्रायल किया

हालांकि, पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि यह “राजनीतिक रूप से प्रेरित” विश्लेषण है। मगर रिपोर्ट में दावा है कि कई खुफिया स्रोतों और रडार गतिविधियों की निगरानी से इस सहयोग की पुष्टि होती है।

भारत की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की वायु सुरक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तंत्र ने पाकिस्तान की रणनीति को निष्क्रिय कर दिया। भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में चौकसी बढ़ाते हुए समय रहते सभी संभावित हमलों का जवाब देने की तैयारी कर ली थी।

क्या है आगे की राह?

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारत-चीन-पाकिस्तान त्रिकोणीय संबंधों में नया तनाव जुड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को अपनी सुरक्षा रणनीतियों को और अधिक आधुनिक व आत्मनिर्भर बनाना होगा ताकि किसी भी बाहरी गठजोड़ से निपटा जा सके।


यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब भारत पहले से ही एलएसी (LAC) पर चीन के साथ और एलओसी (LOC) पर पाकिस्तान के साथ तनाव झेल रहा है। ऐसे में चीन की ‘परदे के पीछे’ की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।

By Dhirendra Giri Goswami

धीरेंद्र गिरि गोस्वामी एक प्रसिद्ध पत्रकार हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हैं। उनके पिता रमन गिरि गोस्वामी छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी के शासकीय अधिकारी रह चुके हैं। धीरेंद्र गिरि गोस्वामी ने पत्रकारिता के साथ-साथ वकालत की पढ़ाई भी की है। उन्होंने टीवी, डिजिटल, प्रिंट और रेडियो मीडिया में 15 वर्षों से अधिक अनुभव प्राप्त किया है। अपने करियर में उन्होंने वनइंडिया, खबर भारती, स्वराज एक्सप्रेस, बंसल न्यूज, ईटीवी, न्यूज वर्ल्ड और भारत समाचार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संवाददाता और सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम किया है। धीरेंद्र ने दूरदर्शन (DD News) में रिपोर्टिंग और लाइव कवरेज किया है और आकाशवाणी (All India Radio) में युवाओं और बच्चों के कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रस्तुति दी है। वर्तमान में वे खबरवीर वेबसाइट के संपादक हैं, जहाँ वे ताज़ा समाचार, गहन विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग प्रदान करते हैं। उनका मुख्य फोकस राजनीति, प्रशासनिक मामलों, सामाजिक मुद्दों और कानूनी विश्लेषण पर आधारित पत्रकारिता है। धीरेंद्र ने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर, वकालत (LLB) की पढ़ाई भी पूरी की है, जो उनके विश्लेषण में कानूनी दृष्टिकोण जोड़ती है। वे सामाजिक जागरूकता और समाजोपयोगी मुद्दों को उजागर करने के लिए सक्रिय रूप से लेखन करते हैं। विशेषज्ञता: राजनीति और प्रशासनिक रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता, संपादकीय नेतृत्व, लाइव ब्रॉडकास्टिंग, युवाओं और बच्चों के कार्यक्रम प्रस्तुति।

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