युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया पर उठे सवाल, छग शालेय शिक्षक संघ ने कहा – ‘प्रश्न तो पूछेंगे साहब!’
स्कूल शिक्षा विभाग के दावों की खुली पोल, आंकड़ों की बाजीगरी और गुमराह करने का आरोप
रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में लागू की जा रही युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ का कहना है कि विभाग शिक्षा की गुणवत्ता के नाम पर सिर्फ कागजी दावा कर रहा है जबकि हकीकत इससे उलट है।
संघ ने उठाए तीखे सवाल
छग शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे और प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा ने आरोप लगाया कि विभाग आंकड़ों की बाजीगरी और कुतर्क के सहारे युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को जायज ठहराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि—
- जब स्थानांतरण पर रोक है, तो हजारों शिक्षकों के मनचाहे स्थानांतरण कैसे हो रहे हैं?
- राष्ट्रीय औसत से बेहतर छात्र-शिक्षक अनुपात का दावा करने वाला विभाग क्यों नहीं बताता कि प्रदेश परीक्षा परिणामों में नीचे क्यों है और एकल शिक्षकीय स्कूलों की संख्या लगातार क्यों बढ़ रही है?
- नवनियुक्त, पदोन्नत और प्रतिनियुक्त शिक्षकों को मनपसंद स्थानों पर कैसे पदस्थ किया जा रहा है? क्या नियम सिर्फ चुनिंदा लोगों पर लागू नहीं होते?
शिक्षकों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न
संघ का कहना है कि विभाग यह प्रचार कर रहा है कि युक्तियुक्तकरण से 7000 एकल शिक्षकीय और शिक्षकविहीन प्राथमिक शालाओं में एक-एक सहायक शिक्षक उपलब्ध हो जाएंगे। लेकिन वह यह नहीं बता रहा कि इससे 60 से कम दर्ज संख्या वाली लगभग 20000 प्राथमिक शालाएं व्यावहारिक रूप से एकल शिक्षकीय हो जाएंगी। क्योंकि इनमें एक प्रधानपाठक और एक सहायक शिक्षक ही रहेंगे, जिनमें से कोई एक शिक्षक शासकीय कार्य, अवकाश, या अन्य कारणों से अक्सर स्कूल से बाहर रहता है। ऐसे में न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराएगा।
विभाग की नीयत पर सवाल
वीरेंद्र दुबे और धर्मेश शर्मा ने कहा कि विभाग पूर्व माध्यमिक शालाओं में शिक्षक पदस्थापना के समय शिक्षा के अधिकार अधिनियम की अनदेखी करता आया है और अब उसी का हवाला देकर युक्तियुक्तकरण कर रहा है। भर्ती और पदोन्नति में विषयवार बाध्यता को हटाकर विभाग ने स्वयं नियमों को कमजोर किया और अब उसी आधार पर 105 से कम दर्ज संख्या वाली 7000 पूर्व माध्यमिक शालाओं से एक शिक्षक घटा रहा है।
प्रचार अलग, हकीकत अलग
संघ के अनुसार हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में हजारों प्राचार्य और व्याख्याता के पद रिक्त हैं, लेकिन पिछले 8–10 वर्षों में विभाग ने कोई व्यापक पदोन्नति प्रक्रिया नहीं अपनाई। वहीं सीधी भर्ती और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से मनचाही पदस्थापनाएं होती रहीं।
संगठन ने जताई आशंका
प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और प्रांतीय मीडिया प्रभारी जितेन्द्र शर्मा ने कहा कि—
- लगभग 15000 प्राथमिक शालाएं ऐसी हैं जिनमें दर्ज संख्या 60 से कम है। इनमें एक प्रधान पाठक और एक सहायक शिक्षक के भरोसे 5 कक्षाओं की पढ़ाई और बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
- इन विद्यालयों से औसतन एक-एक शिक्षक अतिशेष होंगे, जबकि विभाग को केवल 7000 सहायक शिक्षक की आवश्यकता बताई जा रही है।
- पूर्व माध्यमिक शालाओं में विषय के आधार पर 8000 और एक पद कम करने से 7000 शिक्षक अतिशेष हो जाएंगे।
- हायर सेकेंडरी स्कूलों में कालखंड के आधार पर 5000 से अधिक व्याख्याताओं को भी अतिशेष घोषित किया जाएगा।
35,000 से अधिक शिक्षक होंगे प्रभावित
संघ का आकलन है कि युक्तियुक्तकरण की इस प्रक्रिया से प्रदेश में लगभग 35,000 शिक्षक अतिशेष की श्रेणी में आ जाएंगे, जबकि विभाग केवल 7000 स्कूलों को शिक्षकविहीन या एकल बताता है।
सुझाव व चेतावनी
संघ ने स्पष्ट किया कि वह भी एकल शिक्षकीय व शिक्षकविहीन शालाओं में शिक्षकों की नियुक्ति का पक्षधर है, लेकिन युक्तियुक्तकरण की वर्तमान प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है। संगठन ने मांग की है कि—
- युक्तियुक्तकरण से पूर्व पदोन्नति और स्थानांतरण की प्रक्रिया पूर्ण की जाए।
- अतिशेष शिक्षकों की गणना वर्ष 2008 के विभागीय सेटअप के अनुसार की जाए।
संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर सभी संगठनों से चर्चा कर इस संवेदनशील मसले का सर्वसम्मत समाधान निकालें।
