महिलाओं को बड़ी सौगात: छत्तीसगढ़ में जमीन रजिस्ट्री पर अब 50% छूट
रायपुर, 07 मई 2026।
छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए महिलाओं के नाम पर होने वाली जमीन रजिस्ट्री में 50 प्रतिशत शुल्क छूट देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल और वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय अब आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इसकी अधिसूचना आज राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई।
महिलाओं को मिलेगा संपत्ति का अधिकार
सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें संपत्ति का मालिकाना हक दिलाना है। इस फैसले के बाद परिवारों को महिलाओं के नाम पर जमीन और संपत्ति खरीदने के लिए बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के नाम संपत्ति होने से उनकी सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी और परिवार तथा समाज में निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले – “सशक्त महिला ही सशक्त प्रदेश की पहचान”
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को जमीन और संपत्ति का स्वामित्व मिलने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस करेंगी।
उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ आर्थिक राहत नहीं बल्कि महिलाओं को समाज में मजबूत पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा – “यह खर्च नहीं, भविष्य में निवेश”
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस योजना से राज्य सरकार पर करीब 153 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व भार आएगा, लेकिन इसे सरकार महिला सशक्तिकरण में निवेश मानती है।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय के दूरगामी सामाजिक और आर्थिक परिणाम सामने आएंगे तथा महिलाओं की भागीदारी संपत्ति और वित्तीय मामलों में तेजी से बढ़ेगी।
अधिसूचना में क्या है प्रावधान?
राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, अब यदि किसी अचल संपत्ति का हस्तांतरण महिलाओं के नाम किया जाता है, तो उस पर लगने वाले निर्धारित रजिस्ट्रेशन शुल्क में सीधे 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
महिलाओं में खुशी की लहर
सरकार के इस फैसले का महिलाओं और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है। माना जा रहा है कि इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और राज्य में महिला स्वामित्व वाली संपत्तियों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा।
