दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने स्पष्ट किया कि उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा कभी भी स्टोररूम में कोई नकद राशि नहीं रखी गई है। उन्होंने कहा कि आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और उनका परिवार हमेशा कानूनी और पारदर्शी तरीके से कार्य करता आया है।
न्यायमूर्ति वर्मा ने यह बयान उस समय दिया जब उनके परिवार के खिलाफ स्टोररूम में बड़ी मात्रा में नकद राशि रखने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार हमेशा नियमों और कानूनों के तहत ही कार्य करता है और कभी भी अवैध संपत्ति या नकद राशि नहीं रखी गई है।
साथ ही, न्यायमूर्ति वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका कोई भी कर्तव्य, चाहे वह न्यायिक हो या पारिवारिक, हमेशा कानून के अनुसार होता है। उनका मानना है कि बिना किसी ठोस प्रमाण के लगाए गए आरोप सिर्फ बदनामी का कारण बनते हैं।
इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति वर्मा से जवाब मांगा था, जिसके बाद उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उनके इस स्पष्टीकरण से अदालत के सामने उठे सवालों का संतोषजनक उत्तर मिल गया है, और यह मामला अब निष्पक्षता से सुलझने की ओर बढ़ सकता है।