17 अगस्त को मंत्रिमंडल विस्तार? वरना दिसंबर तक लंबा ब्रेक तैयारियों में तेजी ‘छत्तीसगढ़ मण्डपम’ बना नया संकेत

रायपुर/ 16 अगस्त। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से प्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार की उलटी गिनती अब वाकई शुरू हो चुकी है और हड़बड़ी साफ दिखाई देने लगी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के 21 अगस्त से शुरू हो रहे पहले विदेश दौरे और उससे पहले के सियासी मूवमेंट्स अब इशारों से ज़्यादा खुलकर दिखने लगे हैं।

एक ओर यह खबर सामने आई कि मुख्यमंत्री 21 से 31 अगस्त तक जापान और दक्षिण कोरिया के दौरे पर रहेंगे जहां वे निवेशकों से मुलाकात करेंगे। वही दिन है जब एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नामांकन दाखिल होना है जिसमें सभी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे। जाहिर है मुख्यमंत्री को 20 अगस्त या उससे पहले दिल्ली रवाना होना होगा। उपराष्ट्रपति के नामांकन के बाद विदेश भी तो जाना है।

यानि 17, 18 और 19 अगस्त यही तीन दिन शपथ ग्रहण के लिए उपलब्ध हैं। और 17 अगस्त रविवार सबसे मुफीद नजर आता है।

इसी बीच एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया गया है जो इस जल्दबाज़ी की पुष्टि करता है। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजभवन के दरबार हॉल का नाम बदलकर छत्तीसगढ़ मण्डपम कर दिया गया। यह वही स्थान है जहां नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जानी है। राज्यपाल रमेन डेका ने इसका विधिवत अनावरण भी कर दिया।

इस सटीक टाइमिंग को नजरअंदाज करना मुश्किल है। शपथ की संभावनाओं के बीच भारत मंडपम की तर्ज पर दरबार हाल का नाम बदलना और उसका सांस्कृतिक स्थानीयकरण राजनीतिक सिग्नल की तरह देखा जा रहा है।

जब महीनों से यह विस्तार टाला जा रहा था तो अब यह अचानक तेज़ी क्यों। क्या सिर्फ मुख्यमंत्री का विदेश दौरा इसकी वजह है। क्या यह जल्दबाजी सकारात्मक रणनीति है या एक मजबूरी।

यदि छत्तीसगढ़ में विस्तार इतना जरूरी हो गया है तो क्या यही राजनीतिक तात्कालिकता राजस्थान और मध्यप्रदेश में नहीं है। मोहन यादव कैबिनेट में कुछ मंत्रियों की जगह खाली है, जबकि बीजेपी ने कई सीनियर विधायक भी इस बार मंत्री नहीं बन पाए थे। राजस्थान में भी यही स्थिति है। तो केवल छत्तीसगढ़ में सबसे पहले विस्तार क्यों? सवाल है कि क्या छत्तीसगढ़ को एक अलग ही सोच के साथ राजनीतिक प्रयोगशाला की तरह ट्रीट किया जा रहा है।

भाजपा की चुनावी रणनीति अक्सर राज्यवार प्रयोगों से गुजरती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में यह विस्तार शायद उपेक्षित किए गए वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी से हो रहे नुकसान की भरपाई और 2025-26 की तैयारी का हिस्सा हो।

अगर 17, 18, 19 अगस्त में मंत्रिमंडल विस्तार नहीं होता तो अगला मौका सीधे दिसंबर में ही दिखाई देता है।

क्योंकि उसके बाद
मुख्यमंत्री विदेश दौरे पर रहेंगे 21 से 31 अगस्त
गणेश पक्ष शुरू हो जाएगा,
फिर पितृ पक्ष, अक्टूबर में बिहार चुनावों की अधिसूचना, नवंबर में प्रचार और राजनीतिक व्यस्तता, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस, इसी बीच पड़ेंगे दशहरा और दीपावली, जैसे प्रमुख पर्व और फिर दिसंबर

त्योहारों के दौरान अमूमन राजनीतिक दल किसी तरह के प्रशासनिक या मंत्रिमंडलीय फेरबदल से बचते हैं। ऐसे समय में आम जनता की धार्मिक-सामाजिक व्यस्तता, सरकारी अमले की छुट्टियां और राजनीतिक गतिविधियों की संवेदनशीलता को देखते हुए कोई बड़ा निर्णय टाल दिया जाता है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि अगस्त के इन तीन दिनों के बाद अगला व्यावहारिक अवसर दिसंबर में ही आएगा। दिसंबर में ही विधानसभा का शीतकालीन सत्र संभावित रहता है। सत्र के पूर्व नए मंत्री बनाए जाते हैं।

बहरहाल 15 साल तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रह चुके रमन सिंह भी अपने कार्यकाल के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार जैसे बड़े फैसले दिसंबर में ही किया करते थे जब तमाम पर्व-त्योहार निपट चुके होते थे। ऐसे में यह वक्त राजनीतिक दृष्टि से सबसे उपयुक्त माना जाता रहा है।

इस पूरी घटनाक्रम, तिथियों और प्रशासनिक गतिविधियों को देखते हुए यह संभावना काफी मजबूत नजर आ रही है कि या तो 17 अगस्त को मंत्रियों की शपथ होगी, या फिर मामला दिसंबर तक टल सकता है।

हालांकि यह कोई दावा नहीं है। लेकिन फिलहाल जो संकेत हैं, वे इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल का विस्तार इसी माह में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विदेश दौरे से पहले तीन नए मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने की संभावना जताई जा रही है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार रायपुर बिलासपुर और दुर्ग संभाग से एक-एक विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है।

संभावित नामों की सूची में कई वरिष्ठ नेता और अनुभवी विधायक शामिल हैं। बस्तर से लता उसेंडी बिलासपुर से अमर अग्रवाल और धरमलाल कौशिक दुर्ग से गजेंद्र यादव रायपुर से राजेश मूणत सुनील सोनी और पुरंदर मिश्रा के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।

इनमें से कुछ नाम संगठन के अनुभव और कुछ सामाजिक-सामरिक संतुलन के आधार पर देखे जा रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय दिल्ली दरबार से ही तय होता है। नामों पर अंतिम मुहर केंद्रीय नेतृत्व लगा चुका है।

(धीरेंद्र गिरि गोस्वामी)

By Dhirendra Giri Goswami

धीरेंद्र गिरि गोस्वामी एक प्रसिद्ध पत्रकार हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हैं। उनके पिता रमन गिरि गोस्वामी छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी के शासकीय अधिकारी रह चुके हैं। धीरेंद्र गिरि गोस्वामी ने पत्रकारिता के साथ-साथ वकालत की पढ़ाई भी की है। उन्होंने टीवी, डिजिटल, प्रिंट और रेडियो मीडिया में 15 वर्षों से अधिक अनुभव प्राप्त किया है। अपने करियर में उन्होंने वनइंडिया, खबर भारती, स्वराज एक्सप्रेस, बंसल न्यूज, ईटीवी, न्यूज वर्ल्ड और भारत समाचार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संवाददाता और सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम किया है। धीरेंद्र ने दूरदर्शन (DD News) में रिपोर्टिंग और लाइव कवरेज किया है और आकाशवाणी (All India Radio) में युवाओं और बच्चों के कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रस्तुति दी है। वर्तमान में वे खबरवीर वेबसाइट के संपादक हैं, जहाँ वे ताज़ा समाचार, गहन विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग प्रदान करते हैं। उनका मुख्य फोकस राजनीति, प्रशासनिक मामलों, सामाजिक मुद्दों और कानूनी विश्लेषण पर आधारित पत्रकारिता है। धीरेंद्र ने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर, वकालत (LLB) की पढ़ाई भी पूरी की है, जो उनके विश्लेषण में कानूनी दृष्टिकोण जोड़ती है। वे सामाजिक जागरूकता और समाजोपयोगी मुद्दों को उजागर करने के लिए सक्रिय रूप से लेखन करते हैं। विशेषज्ञता: राजनीति और प्रशासनिक रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता, संपादकीय नेतृत्व, लाइव ब्रॉडकास्टिंग, युवाओं और बच्चों के कार्यक्रम प्रस्तुति।

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