रायपुर।छत्तीसगढ़ में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। 18 अगस्त को शपथग्रहण की जो चर्चा तेज़ थी, वह अब पूरी तरह से सिर्फ़ अफवाह साबित हुई है। शपथग्रहण की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए माना जा रहा है कि कार्यक्रम टल चुका है।
खबरवीर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि “यदि 17 अगस्त तक शपथ नहीं होता, तो मामला दिसंबर तक खिंच सकता है।” अब वही स्थिति बनती दिख रही है। हमने 18 अगस्त को शपथ होने की खबरों को आधिकारिक सूचना ना मिलने की वजह से प्रकाशित नहीं किया था। विष्णुदेव साय 21 अगस्त से विदेश दौरे पर रहेंगे और उसके बाद त्योहार, पितृ पक्ष और अन्य राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण शपथग्रहण की संभावनाएँ कम होती जा रही हैं। हालांकि अब भी संभावना है कि 19 या 20 को शपथ ग्रहण हो जाए..क्योंकि नई भाजपा में कब क्या हो जाए,कोई नहीं बता सकता।स्वयं पार्टी के बड़े नेता भी…
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इस घटनाक्रम के बाद यह भी साफ होता जा रहा है कि फैसला कब होगा, यह केवल मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व ही तय करेगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि “भाजपा में यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि कब क्या फैसला हो जाए। सब कुछ अंतिम समय तक गोपनीय रहता है।”
यानी फिलहाल कोई यह दावा नहीं कर सकता कि अगला कदम क्या होगा और कब होगा। यह भी संभव है कि एक या दो नामों पर सहमति बनते ही अचानक शपथग्रहण हो जाए, और यह भी कि मामला दिसंबर तक लटक जाए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह असमंजस सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में भी मंत्रिमंडल के कुछ पद रिक्त हैं, लेकिन फिलहाल वहाँ भी कोई हलचल नहीं है।
ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि क्या छत्तीसगढ़ को एक प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ पार्टी संगठन और नेतृत्व के संतुलन के आधार पर निर्णय लिए जा रहे हैं?
फिलहाल स्थिति यही कहती है कि
“जवाब केवल मुख्यमंत्री के पास है, और घोषणा जब होगी – तब होगी।”
