“शदाणी दरबार में संस्कृति का संगम: रामायण, महाभारत से जीवन जीने की सीख, पब्लिक स्पीकिंग पर विशेष मार्गदर्शन”
— ‘अच्छा बोलना है तो कंटेंट होना चाहिए, लोग क्या कहेंगे का डर छोड़ो’: सीए अमित चिमनानी
रायपुर | पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ में इन दिनों भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों पर आधारित समर कैंप का आयोजन किया गया, जिसमें पूज्य संत युधिष्ठिर लाल महाराज जी के नेतृत्व में सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया। समर कैंप में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित सीए अमित चिमनानी ने सनातन संस्कृति की महिमा, रामायण-महाभारत की प्रासंगिकता और पब्लिक स्पीकिंग की कला पर गहराई से प्रकाश डाला।
सनातन: जो सदा बना रहे
अमित चिमनानी ने अपने संबोधन में कहा कि “सनातन यानि जो कभी खत्म नहीं हो सकता”, यह संस्कृति जीवन के हर पहलू से जुड़ी है – चाहे वो गुरु-शिष्य परंपरा हो या ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति को समझना है तो पहले भारत को समझना होगा।

रामायण से मिला जीवन का दर्शन
चिमनानी ने कहा, “रामायण और महाभारत में जीवन जीने का हर एक संदेश मौजूद है”।
उन्होंने रामायण के प्रसंगों से उदाहरण देते हुए बताया कि श्रीराम के वनगमन में भरा हुआ बलिदान, आज्ञा पालन और भाईचारा हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं।
श्रीराम द्वारा वन देवी से कहे गए शब्दों, भरत के प्रति चिंता, और मांडवी के त्यागपूर्ण जीवन की व्याख्या करते हुए उन्होंने संयुक्त परिवार, कर्तव्यबोध और नीति पर अडिग रहने के भाव को जीवन में उतारने का संदेश दिया।

पब्लिक स्पीकिंग पर बोले अमित: “डर हटाओ, कंटेंट बढ़ाओ”
अमित चिमनानी ने बच्चों के साथ संवाद करते हुए पब्लिक स्पीकिंग पर भी अहम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा, “अच्छा बोलने के लिए कंटेंट जरूरी होता है। लोग क्या कहेंगे इसका डर छोड़िए।”
उन्होंने बच्चों को बताया कि पब्लिक स्पीकिंग कोई सर्टिफिकेट परीक्षा नहीं है, यह अपनी बात आत्मविश्वास से कहने की कला है। जो भी बोले, सोच-समझ कर और सटीक बोले। विषय पर पकड़ और तैयारी सबसे ज़रूरी है।
अटल जी की पंक्तियों से राष्ट्र का गौरव किया उजागर
अमित ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए कहा:
“भारत कोई जमीन का टुकड़ा नहीं, यह जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है। इसकी नदी-नदी गंगा है, कंकर-कंकर शंकर है।”
उन्होंने कहा कि यह वही भूमि है जहां भगवान राम और श्रीकृष्ण जैसे अवतारों ने जन्म लिया।
संस्कारों की पाठशाला बना समर कैंप
शदाणी दरबार का यह समर कैंप केवल एक शिविर नहीं बल्कि संस्कारों की पाठशाला बन गया, जहाँ बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को समझने और उन्हें जीवन में उतारने का अवसर मिला।
उपस्थित रहे कई गणमान्य
इस कार्यक्रम में पूज्य संत युधिष्ठिर लाल महाराज, उदय शदाणी सिंधी काउंसिल के अध्यक्ष ललित जयसिंह, संयोजक बंटी गांवडा, रेशमा शर्मा, शालू शदाणी, सरस्वती बत्रा, किरण कुकरेजा, निकिता पंजवानी सहित सैकड़ों प्रतिभागी उपस्थित रहे।
