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छत्तीसगढ़ में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर फिलहाल छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की सिंगल बेंच ने गुरुवार को दो महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया।
अनुभव की नई शर्त पर विवाद
यह रोक अनुभव की नई शर्त को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं के आधार पर लगाई गई है। अंबिकापुर निवासी डॉ. डीके सोनी ने हाई कोर्ट में दायर याचिकाओं में कहा कि इन पदों के लिए पहले कोई विशेष अनुभव की शर्त नहीं थी। लेकिन 9 मई 2025 को सर्च कमेटी द्वारा जारी इंटरव्यू कॉल लेटर में अचानक एक नई शर्त जोड़ दी गई।
क्या है नई शर्त?
नई शर्त के अनुसार, इन पदों के लिए उम्मीदवार के पास विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंपर्क या प्रशासन जैसे क्षेत्रों में कम से कम:
- मुख्य सूचना आयुक्त पद के लिए 30 वर्ष का अनुभव
- सूचना आयुक्त पद के लिए 25 वर्ष का अनुभव
अनिवार्य कर दिया गया।
इस बदलाव के चलते कुल 172 आवेदकों में से केवल 51 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। डॉ. सोनी ने अपनी याचिका में उल्लेख किया कि उन्होंने दोनों पदों के लिए आवेदन किया था, लेकिन नई शर्त के कारण उन्हें बाहर कर दिया गया।
हाई कोर्ट ने कहा – नियुक्ति नहीं होगी
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट निर्देश दिया कि इंटरव्यू प्रक्रिया के बाद फिलहाल किसी भी नियुक्ति पर रोक रहेगी। यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं आ जाता।
आयोग में संकट: केवल एक सूचना आयुक्त कार्यरत
छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग इस समय खुद संकट के दौर से गुजर रहा है।
- वर्तमान में केवल एक सूचना आयुक्त, आलोक चंद्रवंशी, कार्यरत हैं।
- दूसरे सूचना आयुक्त एन. के. शुक्ल का कार्यकाल 21 मई 2025 को समाप्त हो गया है।
- एम. के. राउत का पद 11 नवंबर 2022 से ही रिक्त पड़ा है।
इस स्थिति में आयोग की कार्यक्षमता पहले से ही प्रभावित हो रही थी और अब नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगने से संकट और गहरा गया है।
क्या होगा आगे?
हाई कोर्ट द्वारा दी गई यह रोक राज्य सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाती है और नियुक्ति से जुड़ी पारदर्शिता और प्रक्रिया के औचित्य पर बहस छेड़ देती है। अब सभी की नजरें कोर्ट में आगामी सुनवाई और राज्य सरकार के रुख पर टिकी हैं।