अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलक रुस्तम सारंग ने लिया संन्यास, छत्तीसगढ़ के खेल जगत को बड़ा झटका
24 साल की खेल सेवा के बाद प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों से पूरी तरह अलग होने का फैसला
छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलक और राज्य के गौरव रुस्तम सारंग ने खेल जगत से संन्यास की घोषणा कर सभी को हैरान कर दिया है। वर्षों तक देश और प्रदेश का नाम रोशन करने वाले रुस्तम सारंग ने यह फैसला सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक किया, जिसके बाद खेल जगत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
रुस्तम सारंग जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी का संन्यास केवल एक व्यक्तिगत फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि यह खेल व्यवस्था और छत्तीसगढ़ खेल विभाग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 24 वर्षों के अनुभव, अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों और प्रशिक्षक के रूप में सेवाओं के बावजूद एक बड़ी खेल हस्ती का खुद को उपेक्षित महसूस करना इस बात का संकेत है कि राज्य में प्रतिभा और अनुभव के उपयोग को लेकर गंभीर चूक हो रही है। जिस खिलाड़ी ने देश और प्रदेश को पहचान दिलाई, वही जब यह कहने को मजबूर हो जाए कि उसके अनुभव की जरूरत नहीं रही, तो यह व्यवस्था की संवेदनहीनता और नीति स्तर की कमजोरी को उजागर करता है।
रुस्तम सारंग ने फेसबुक पोस्ट में साफ शब्दों में लिखा कि वह आज से खेल प्रशिक्षण और खेल से जुड़ी सभी गतिविधियों से संन्यास ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार यह महसूस हो रहा है कि उनके 24 वर्षों के खेल अनुभव की अब न तो राज्य को और न ही समाज को जरूरत समझी जा रही है। इसी भावना के चलते उन्होंने खिलाड़ियों, प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों से खुद को पूरी तरह अलग करने का निर्णय लिया है।
उनकी यह घोषणा न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि प्रदेश के खेल भविष्य को लेकर कई सवाल भी खड़े करती है। पोस्ट के अंत में उन्होंने पारंपरिक अभिवादन के साथ “जय जोहार” लिखते हुए अपनी बात समाप्त की।

उपलब्धियों से भरा रहा शानदार करियर
रुस्तम सारंग का खेल करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और बाद में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का परचम लहराया।
उन्होंने वर्ष 2006 में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उसी साल सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य और गुवाहाटी नेशनल गेम्स में रजत पदक हासिल किया। वर्ष 2007 में ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में स्वर्ण पदक उनके करियर का अहम पड़ाव रहा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा। 2009 में मलेशिया में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2011 और 2014 की वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतते हुए उन्होंने ओलंपिक क्वालिफायर मुकाबलों में भी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। 2015 में केरल नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक के साथ उनका राष्ट्रीय सफर और मजबूत हुआ।

छत्तीसगढ़ सरकार के तीनों बड़े खेल सम्मान
रुस्तम सारंग उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से खेलों के लिए दिए जाने वाले तीनों सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें
शहीद कौशल यादव खेल पुरस्कार (2006-07),
शहीद राजीव पाण्डेय खेल पुरस्कार (2007-08)
और गुंडाधुर सम्मान (2009-10) से नवाजा गया।
पुलिस सेवा के साथ प्रशिक्षण में भी योगदान
रुस्तम सारंग वर्तमान में छत्तीसगढ़ पुलिस में डीएसपी के पद पर पदस्थ हैं। इसके साथ ही वह एक अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशिक्षक के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में कई युवा खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
खेल जगत में निराशा और सवाल
रुस्तम सारंग के संन्यास से छत्तीसगढ़ के खेल जगत में निराशा का माहौल है। खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों का मानना है कि इतना अनुभवी खिलाड़ी और प्रशिक्षक खेल व्यवस्था से दूर होता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का फैसला नहीं बल्कि व्यवस्था की चूक को भी दर्शाता है। उनका जाना छत्तीसगढ़ के खेल भविष्य के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।