सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नक्सल हिंसा से प्रभावित छत्तीसगढ़ राज्य के निवासियों के पुनर्वास और शांति के लिए आवश्यक कदम उठाना छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

मुख्य बिंदु:

  • सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल पुराने मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को बंद कर दिया है।
  • कोर्ट ने कहा कि संसद या राज्य विधानसभा द्वारा बनाए गए कानून को न्यायालय की अवमानना नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी:
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की सुनवाई के दौरान यह बात कही। कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर द्वारा दायर याचिकाओं में 2011 के आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया गया था, जिसमें नक्सल विरोधी अभियानों में विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया था।

पीठ ने कहा, “छत्तीसगढ़ राज्य में दशकों से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि ठोस कदम उठाए जाएं ताकि उन क्षेत्रों में शांति और पुनर्वास लाया जा सके। राज्य और केंद्र सरकार को समन्वित तरीके से कार्य करना चाहिए।”कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी कानून न्यायालय की अवमानना नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह संविधान के खिलाफ न हो।

By Dhirendra Giri Goswami

धीरेंद्र गिरि गोस्वामी एक प्रसिद्ध पत्रकार हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हैं। उनके पिता रमन गिरि गोस्वामी छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी के शासकीय अधिकारी रह चुके हैं। धीरेंद्र गिरि गोस्वामी ने पत्रकारिता के साथ-साथ वकालत की पढ़ाई भी की है। उन्होंने टीवी, डिजिटल, प्रिंट और रेडियो मीडिया में 15 वर्षों से अधिक अनुभव प्राप्त किया है। अपने करियर में उन्होंने वनइंडिया, खबर भारती, स्वराज एक्सप्रेस, बंसल न्यूज, ईटीवी, न्यूज वर्ल्ड और भारत समाचार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संवाददाता और सीनियर रिपोर्टर के रूप में काम किया है। धीरेंद्र ने दूरदर्शन (DD News) में रिपोर्टिंग और लाइव कवरेज किया है और आकाशवाणी (All India Radio) में युवाओं और बच्चों के कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रस्तुति दी है। वर्तमान में वे खबरवीर वेबसाइट के संपादक हैं, जहाँ वे ताज़ा समाचार, गहन विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग प्रदान करते हैं। उनका मुख्य फोकस राजनीति, प्रशासनिक मामलों, सामाजिक मुद्दों और कानूनी विश्लेषण पर आधारित पत्रकारिता है। धीरेंद्र ने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर, वकालत (LLB) की पढ़ाई भी पूरी की है, जो उनके विश्लेषण में कानूनी दृष्टिकोण जोड़ती है। वे सामाजिक जागरूकता और समाजोपयोगी मुद्दों को उजागर करने के लिए सक्रिय रूप से लेखन करते हैं। विशेषज्ञता: राजनीति और प्रशासनिक रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता, संपादकीय नेतृत्व, लाइव ब्रॉडकास्टिंग, युवाओं और बच्चों के कार्यक्रम प्रस्तुति।

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